आजु सखि राखी को त्यौहार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आजु सखि, राखी को त्यौहार ।

चलु वृंदावन, रसिक जनन धन,

राखिन बध बलिहार, आजु सखि,

आजु सखि, राखी को त्यौहार ।

निरखु नीलमणि नील करन कस,

मणिमय राखिन धार, आजु सखि,

आजु सखि, राखी को त्यौहार ।

और और बधावन ललचत,

निरखु दया दरबार, आजु सखि,

आजु सखि, राखी को त्यौहार ।

लाली हंसती ललन ललचन लखि,

लखि उन करन पसार, आजु सखि,

आजु सखि, राखी को त्यौहार ।

कोटि कोटि सखियन उन बांधती,

जिन वश मुक्तिहुं चार, आजु सखि,

आजु सखि, राखी को त्यौहार ।

प्रियदर्शी अलि नित्य मुक्त बलि,

बन्धन नेह निहार, आजु सखि,

आजु सखि, राखी को त्यौहार ।

Shweta Pandey (Varanasi)

"मधुर भजन बेला"

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।