लगी लगी लगन कैसी लगी लगी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

लगी लगी लगन कैसी लगी लगी,

पिया जो भांग का प्याला है,

मन मेरा हुआ मत वाला है,

जितनी पी भांग प्यास उतनी ही लगी,

लगी लगी लगन कैसी लगी लगी....

खाया भंग का गोला मेरा तन मन ढोला,

मैं उडू हवाओ में क्या कर दिया भोला,

नस नस में मेरी भगती ही शाही कैसी है तूने बूटी पिलाई होश गवा बेठा मैं इसी ,

लगी लगी लगन कैसी लगी लगी.....

दिल मेरा बोले जय बम बम भोले,

भगती सागर में मन खाए हिचकोले,

मन मेरा दीवाना है रमका जोगी मैं हु तेरा शिव प्रेम का रोगी,

तेरे नाम का पी के प्याला किस्मत मेरी जगी,

लगी लगी लगन कैसी लगी लगी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।