हरिओम में ॐ समाया है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ

हरि ॐ में ॐ समाया है,

मेरा भोला नगर में आया है,

मेरा भोला नगर में आया है,

हरि ॐ में ॐ समाया है,

मेरा भोला नगर में आया है…

भोले की जटा में गंगा विराजे,

गंगा विराजे हा गंगा विराजे,

गंगा में ॐ समाया है,

मेरा भोला नगर में आया है,

हरि ॐ में ॐ समाया है,

मेरा भोला नगर में आया है.....

भोले के माथे पे चंदा विराजे,

चंदा विराजे हा चंदा विराजे,

चंदा में ॐ समाया है,

मेरा भोला नगर में आया है,

हरि ॐ में ॐ समाया है,

मेरा भोला नगर में आया है……

भोले के गले में सर्प विराजे,

सर्प विराजे हा सर्प विराजे,

सर्पो में ॐ समाया है,

मेरा भोला नगर में आया है,

हरि ॐ में ॐ समाया है,

मेरा भोला नगर में आया है…

भोले के हाथो में डमरू विराजे,

डमरू विराजे हा डमरू विराजे,

डमरू में ॐ समाया है,

मेरा भोला नगर में आया है,

हरि ॐ में ॐ समाया है,

मेरा भोला नगर में आया है…….

भोले के कमर में दुशाला विराजे,

दुशाला विराजे हा दुशाला विराजे,

मृगशाला में ॐ समाया है,

मेरा भोला नगर में आया है,

हरि ॐ में ॐ समाया है,

मेरा भोला नगर में आया है……..

भोले के संग में गौरा विराजे,

गौरा विराजे हा गौरा विराजे,

गोदी में गणपत समाया है,

मेरा भोला नगर में आया है,

हरि ॐ में ॐ समाया है,

मेरा भोला नगर में आया है…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।