ये बंसी वैरन है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

धुन- ये दिल तो पागल है

ये बंसी वैरन है, दो घड़ी चैन से न सोने दे ll,

लवों पे कब, जा करके बैठी, मन चाही न होने दे,,,

ये बंसी वैरन है, दो घड़ी चैन से ना सोने दे ll

उनके अधरों, पे लवों को, हम भी रख के देखें,

जिस रस को है, चखती बंसी, हम भी चख के देखें ll

प्रेम की अमृत, वर्षा में, तन मन को ना भिगोने दे,,,

ये बंसी वैरन है, दो घड़ी चैन से ना सोने दे ll

श्याम हमारा, दिलबर है कुछ, हक हमारा होगा,

हसरतें है, दिल की दिल में, कैसे गुज़ारा होगा ll

कभी कहा ना, बहती गंगा में, हाथ हमे भी धोने दे,,,

ये बंसी वैरन है, दो घड़ी चैन से ना सोने दे ll

पथरीला पथ है, टेढ़ी राहें, दूर बड़ा बरसाना,

सपना लेकर, आते हैं सब, ख़ाली पड़ता जाना ll

कमल सिंह ना, रोके हमे, अब जी भरके रोने दे,,,

ये बंसी वैरन है, दो घड़ी चैन से ना सोने दे ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।