शिव डमरूवाले को ना दिल से भुलाना

पारंपरिक
महादेव आरती शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव डमरूवाले को ना दिल से भुलाना तू,

शम्भु त्रिपुरारी की नित आरती गाना तू...

शिव शिव कह के प्राणी जीने का मजा लेले,

मालूम नहीं कब तू दुनिया से रजा लेले,

भोले भंडारी को निज हाल सुनाना तू,

शम्भु त्रिपुरारी की नित आरती गाना तू...

भोले के भरोसे पे कर्मो को किये जा तू,

दो दिन की रवानी है हंस हंस की जिये जा तू,

माया की दीवानों का कुछ खोफ ना रवाना तू,

शम्भु त्रिपुरारी की नित आरती गाना तू....

पी कर के ज़हर शिव ने अमृत को बिसारा था,

कर जोड़ के देवों ने शंकर को पुकारा था,

शिव चरण के पानी को आँखों से लगाना तू,

शम्भु त्रिपुरारी की नित आरती गाना तू....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।