भोले के हम दीवाने हैं

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पग पग मिलते भक्ति, के जहाँ अजब नज़ारे,

चलो चले सब हरिद्वार, हम शिव के द्वारे,

शिव के द्वारे अजब नज़ारे,

शिव के द्वारे अजब नज़ारे,

भोले के हम दीवाने हैं, भोले के हम दीवाने हैं,

गंगा जल से भर के गागर, लाए शिव को चढाने हैं,

भोले के हम दीवाने हैं, भोले के हम दीवाने हैं…….

और नहीं कोई दूजा ऐसा, जैसे भोले भाले वो,

देवों की ख़ातिर हँस हँस पी गए, पी गए विष के प्याले वो,

निर्बल और निर्धन की ख़ातिर, खोले अपने खजाने हैं,

भोले के हम दीवाने हैं, भोले के हम दीवाने हैं……

है देव निराले, बड़े भोले भाले,

हमें शक्ति देते, शिव भोले,

हमें भक्ति देते, शिव भोले,

संकट हर लेते, शिव भोले,

झोली भर देते, शिव भोले,

सब कष्ट मिटाये, शिव भोले,

जो शरण में आए, शिव भोले,

सब कष्ट मिटायें, शिव भोले,

जो शरण में जाएँ, शिव भोले,

जय हो जय हो, जय हो,

जिसने जैसा वर माँगा है, कभी नहीं इंकार किया,

डूबने वालों को मेरे शिव ने, पल में भव से पार किया,

देवों में महादेव कहाए, सारी दुनियाँ ये मानें हैं,

भोले के हम दीवाने हैं, भोले के हम दीवाने हैं,

भोले के हम दीवाने हैं, भोले के हम दीवाने हैं…….

सावन मास में भोले शंकर, द्वार दया के खोलेंगे,

जाएँ शिव की शरण में हम भी, हर हर बम बम बोलेंगे,

सोम भाव से ज्योत जगा के, आये शिव को मनाने हैं,

भोले के हम दीवाने हैं, भोले के हम दीवाने हैं,

भोले के हम दीवाने हैं, भोले के हम दीवाने हैं,

गंगा जल से भर के गागर, लाए शिव को चढाने हैं,

भोले के हम दीवाने हैं, भोले के हम दीवाने हैं…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।