जान से प्यारी शिव शंकर की मूर्ति

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मुझे जान से प्यारी है, शिव शंकर की मूर्ति,

सारे जग से न्यारी है, शिव शंकर की मूर्ति,

शिव शंकर की मूर्ति, अभ्यंकर की मूर्ति,

बड़ी सिद्धिकारक है, शिव शंकर की मूर्ति,

मुझे जान से प्यारी है, शिव शंकर की मूर्ति….

सौ सूरज का तेज उसके,मुखड़े पर है झलक रहा,

नैनों से संजीवनी जैसा, पावन अमृत छलक रहा,

सौ सूरज का तेज उसके,मुखड़े पर है झलक रहा,

नैनों से संजीवनी जैसा, पावन अमृत छलक रहा,

मन मोहक सुखदायी है, शिव शंकर की मूर्ति,

मुझे जान से प्यारी है, शिव शंकर की मूर्ति……

कानों में बिच्छुओं के कुण्डल, गले नाग की माला है,

अर्ध चंदा उसके मस्तक, जचता बहुत निराला है,

कानों में बिच्छुओं के कुण्डल, गले नाग की माला है,

अर्ध चंदा उसके मस्तक, जचता बहुत निराला है,

बड़ी मंगल शुभकारी है, शिव शंकर की मूर्ति,

सारे कष्ट निवारक है, शिव शंकर की मूर्ति,

मुझे जान से प्यारी है, शिव शंकर की मूर्ति……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।