श्याम दे ध्यान विच लाईया क्युं ना अँखीयां

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम दे ध्यान विच लाईया क्युं ना अँखीयां,

श्याम दे ध्यान विच लाईया क्युं ना अँखीयां,

रज रज वेख के रजाईया क्युं ना अँखीयां,

श्याम दे ध्यान विच.....

इन अँखीया विच पई मैल अज्ञान दी,

बन्दे तेरी निगाह जे ना श्याम नु पहचानदी,

श्याम नु पहचानदी...

किसे अकल वाले नु दिखाईयां क्यु ना अँखीयां,

रज रज वेख के रजाईयां क्युं ना अँखीया,

श्याम दे ध्यान विच.....

होवे नुकसान ते मकान वांगु चौदींआं,

श्याम दे विछोड़े विच छम छम रोदींया,

छम छम रोदींया.....

श्याम दी याद विच पर बरसाईयां क्यो ना अँखीयां,

रज रज वेख के रजाईया क्युं ना अँखीयां,

श्याम दे ध्यान विच.....

मन्दिरां दी मूर्ति नु वेख के लै जांदीया ने,

श्याम दा नाम गान वेले निवियां हो जांदीया ने,

निवियां हो जांदीया ने....

पापा वेले ए शर्माईयां क्यो ना अँखीयां,

रज रज वेख के रजाईयां क्यु ना अँखीयां,

श्याम दे ध्यान विच.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।