भोले जी तेरी ना मानूंगी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले जी तेरी एक ना मानूंगी,

सवेरे उठ पीहर जाऊंगी.....

पिहर तुम कैसे जाओगी,

रस्ते में ब्रह्मा जी मिल जाएंगे,

ब्रह्मा जी से पर्दा कर लूंगी, सवेरे उठ पीहर जाऊंगी.....

पिहर तुम कैसे जाओगी,

रस्ते में विष्णु जी मिल जाएंगे,

विष्णु जी से आज्ञा ले लूंगी, सवेरे उठ पीहर जाऊंगी....

पिहर तुम कैसे जाओगी,

रस्ते में रामा जी मिल जाएंगे,

रामा जी से हस बतला लूंगी, सवेरे उठ पीहर जाऊंगी....

पिहर तुम कैसे जाओगी,

रस्ते में कान्हा जी मिल जाएंगे,

कन्हैया को साथ में ले लूंगी, सवेरे उठ पीहर जाऊंगी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।