ये प्रीत तुमसे लागी ओ बाबोसा भगवन

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - ये मोह मोह के धागे

ये प्रीत तुमसे लागी,

प्रीत तुमसे लागी,

हम.....हम.....,

ये प्रीत तुमसे है लागी, ओ मेरे बाबोसा भगवन,

तेरे चरणों मे ही ये अर्पण, कर दिया है अब ये जीवन,

मेरे दिल ने यही पुकारा,

मेरे दिल ने यही पुकारा, कब होंगे तेरे दर्शन,

ये प्रीत तुमसे है लागी, ओ मेरे बाबोसा भगवन,

तेरे चरणों मे ही ये अर्पण, कर दिया है अब ये जीवन.....

मैं नही तेरे काबिल, मुझे अपना तू बना,

कहाँ अब जाँऊ बता, अब जाँऊ बता तेरे बिन,

मैं नही तेरे काबिल, मुझे अपना तू बना,

दाता तू मेरा, याचक मैं बाबा हूँ तेरा,

मुझको तो दे दो अब शरण,

ये प्रीत तुमसे है लागी....

की अब तू तो आकर के, बाँहे थाम ले,

हर घड़ी, ये दिल मेरा, बस तेरा ही नाम ले,

की अब तू आकर के, बाँहे थाम ले,

क्या मेरी खता, बाबोसा इतना बता,

"दिलबर’’ के दाता हों कहाँ,

ये प्रीत तुमसे है लागी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।