तेरे चरणों की दासी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हो भोले बोले तो सही,

तेरे चरणों की दासी कब से दर पे खड़ी....

तू नही बोलेगा तो गंगा बन जाउंगी,

गंगा बन जाउंगी जटा में रम जाउंगी,

हो भोले बोले तो सही,

तेरे चरणों की दासी कब से दर पे खड़ी.....

तू नही बोलेगा तो चंदा बन जाउंगी,

चंदा बन जाउंगी माथे प लग जाउंगी,

हो भोले बोले तो सही,

तेरे चरणों की दासी कब से दर पे खड़ी.....

तू नही बोलेगा तो नाग बन जाउंगी,

नाग बन जाउंगी गले मैं राम जाउंगी,

हो भोले बोले तो सही,

तेरे चरणों की दासी कब से दर पे खड़ी.....

तू नही बोलेगा तो भभूत बन जाउंगी,

भभूत बन जाउंगी मैं तन पे राम जाउंगी,

हो भोले बोले तो सही,

तेरे चरणों की दासी कब से दर पे खड़ी......

तू नही बोलेगा तो डमरू बन जाउंगी,

डमरू बन जाउंगी हाथों में राम जाउंगी,

हो भोले बोले तो सही,

तेरे चरणों की दासी कब से दर पे खड़ी.....

तू नही बोलेगा तो घुँघरू बन जाउंगी,

घुँघरू बन जाउंगी पैरों में बंध जाउंगी,

हो भोले बोले तो सही,

तेरे चरणों की दासी कब से दर पे खड़ी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।