बंसी ना बजाया कर रोज तड़के

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बंसी ना बजाया कर रोज तड़के,

छोटा जेहा दिल मेरा पया धड़के....

हाथ मेरे विच गंगा जल गड़वा,

इस्नान करावा सुबहे तड़के,

छोटा जेहा दिल मेरा पया धड़के,

बंसी ना बजाया कर रोज तड़के.....

हाथ मेरे विच फुल्लो वाली माला,

हार पहनावा सुबहे तड़के,

छोटा जेहा दिल मेरा पया धड़के,

बंसी ना बजाया कर रोज तड़के.....

हाथ कटोरी केसर रोली,

तिलक लगावा सुबहे तड़के,

छोटा जेहा दिल मेरा पया धड़के,

बंसी ना बजाया कर रोज तड़के.....

हाथ मेरे विच पिला पीताम्बर,

वस्त्र पहनावा सुबहे तड़के,

छोटा जेहा दिल मेरा पया धड़के,

बंसी ना बजाया कर रोज तड़के.....

हाथ मेरे विच मखन मिश्री,

भोग लगावा सुबहे तड़के,

छोटा जेहा दिल मेरा पया धड़के,

बंसी ना बजाया कर रोज तड़के.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।