माँ ने खोलते खज़ाने

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दर खुला जदों सच्ची सरकार दा,

फेर मन विच सोचा कि विचारदा,

जैकारा तू बुला ते सही,

माँ ने खोलते खज़ाने भरे झोलियाँ,

तू झोली नु फैला ते सही,

दर खुला जदों सच्ची सरकार दा....

जिने बोलेया जयकारा दर आके के मईया नु धयाके,

के ओहनु रही कोई थोड़ ना,

तू वी करलें दीदार भोली माँ दे के ठण्डी मीठी छाह दे ,

के ओहनु रही कोई लोड़ ना,

जिने श्रद्धा नाल शिश नु झुका लेया,

ओहने मन चाहा फल ऐथो पा लेया,

तू शिश नु झुका ते सही,

माँ ने खोलते खज़ाने भरे झोलियाँ,

तू झोली नु फैला ते सही,

दर खुला जदों सच्ची सरकार दा....

लखा तरगे लखा ने तर जाणा के जिने दर ओणा,

तू लौनै दस क्यूँ देरियाँ,

तू वी वेखलै ज़रा अजमाके ते लेखां नु जगाके,

क्यूँ फ़ैसेया घुमणघेरियां,

भरें झोलियाँ एह मुँहों वी नी दसदी,

सदा अँग सँग दाती तेरे वसदी,

तू दिल नु टिका ते सही,

माँ ने खोलते खज़ाने भरे झोलियाँ,

तू झोली नु फैला ते सही,

दर खुला जदों सच्ची सरकार दा....

स इक वारी ऐदा होके बैजा तू जो चाहे लैजा हैं,

कमी एथें केडी गल दी,

एदी नजरां च कोई वी अमीर नी ते कोई वी ग़रीब नी,

हैं सदा श्रद्धा दे वल दी,

बाक़ी सारी गल छड दे फिज़ूल दी,

जीवे बणी संजीव सरदूल दी,

तू अपणी बनातें सही,

माँ ने खोलते खज़ाने भरे झोलियाँ,

तू झोली नु फैला ते सही,

दर खुला जदों सच्ची सरकार दा....

प्रेषक:

कुमार सुनील फोक सिंगर

हिसार हरियाणा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।