झरनेश्वर भोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हो भोले तेरे दर पे आए,

बाबा आस लगाए,

बस तेरे गुण गाए,

तन मन धन सब तुजपे लुटाए,

हो भोले तेरे दर पे आए,

बाबा आस लगाए,

बस तेरे गुण गाए,

तन मन धन सब तुजपे लुटाए,

आ जाओ लेके नंदी की सवारी,

भोले सुनलो अरजी हमारी....

झर झर झर झरनेश्वर भोले,

बहता जटा से पानी,

वन में तेरा वास जहा से,

प्रकटे चारभुजा जी,

झर झर झर झरनेश्वर भोले,

बहता जटा से पानी,

वन में तेरा वास जहा से,

प्रकटे चारभुजा जी....

नगरी नगरी ढूंढत ढूंढत, आया तेरे द्वारे,

बेटा हूं मै तेरा भोले, मुझको गले लगा ले,

नगरी नगरी ढूंढत ढूंढत, आया तेरे द्वारे,

बेटा हूं मै तेरा भोले, मुझको गले लगा ले,

कहते हैं तुजको वन हिमालय वासी,

चरणों में देदो जगह तुम जरा सी....

झर झर झर झरनेश्वर भोले,

बहता जटा से पानी,

वन में तेरा वास जहा से,

प्रकटे चारभुजा जी,

झर झर झर झरनेश्वर भोले,

बहता जटा से पानी,

वन में तेरा वास जहा से,

प्रकटे चारभुजा जी….

पापी दुनिया की माया से, खुद को कैसे बचाओगे,

कण कण में प्रभु वास है करते नजरें कैसे मिल आओगे,

पापी दुनिया की माया से, खुद को कैसे बचाओगे,

कण कण में प्रभु वास है करते नजरें कैसे मिल आओगे,

भोले देखो माया तुम्हारी,

आने नहीं देती शरण तिहारी…..

झर झर झर झरनेश्वर भोले,

बहता जटा से पानी,

वन में तेरा वास जहा से,

प्रकटे चारभुजा जी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।