तीनों लोकों में भोला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बात सदियों से मशहूर है ज़माने में,

एक पल लगता है महादेव को मानाने में,

जिसने भोला कहा भर भर के झोली,

रखा छुपके नाम भोले ने उस खजाने में,

तीनों लोकों में भोला के जैसा,

दूसरा कोई दानी नहीं है...

कौनसा भक्त है बात जिसकी,

मेरे भोले ने मानी नहीं है,

तीनों लोकों में भोला के जैसा,

दूसरा कोई दानी नहीं है....

बात सच्ची है करना ना शंकर,

दे दी रावन को सोने की लंका,

वेद ग्रंथो में लिखा हुआ है,

कोई झूठी कहानी नहीं है,

तीनों लोकों में भोला के जैसा,

दूसरा कोई दानी नहीं है....

फेरी देवो ने जब शिव की माला,

दे के अमृत पिया विष का प्याला,

किसको भोले ने क्या क्या दिया है,

बात कोई छुपानी नहीं है,

तीनों लोकों में भोला के जैसा,

दूसरा कोई दानी नहीं है....

पाप धोने थे सारे जहाँ के,

शिव ने गंगा हमे देदी आके,

शिव की करुणा भी इसमें मिली है,

गंगा अमृत है पानी नहीं है....

तीनों लोकों में भोला के जैसा,

दूसरा कोई दानी नहीं है,

कौनसा भक्त है बात जिसकी,

मेरे भोले ने मानी नहीं है....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।