जिसके सर पे भोले नाथ तेरा हाथ रहे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

( मत भागो दौलत के पीछे,

आज इधर है कल उधर जाएगी,

मोहब्बत महाकाल से करो,

ये जिंदिगी सवर जाएगी। )

जिसके सर पे तेरा हाथ सदा रहे भोले नाथ,

जिसके सर पे तेरा हाथ सदा रहे भोले नाथ,

उसे दुनिया की ताकत झुकाती नहीं,

जिसके सर पे तेरा हाथ सदा रहे भोले नाथ,

उसे दुनिया की ताकत झुकाती नहीं....

तू ही कालो का काल है,

ओ महाकाल,

तेरे भक्तो को मौत भी डराती नहीं,

जिसके सर पे तेरा हाथ सदा रहे भोले नाथ,

जिसके सर पे तेरा हाथ सदा रहे भोले नाथ……

तेरे आगे किसी का कुछ चलता नहीं,

हाँ हाँ चलता नहीं हो हो चलता नहीं,

जो भी तुमने लिखा है कभी टलता नहीं,

हाँ हाँ टलता नहीं भोले टलता नहीं,

हो तेरे मर्ज़ी के बिन सूरज ढलता नहीं,

महादेव तेरी छाया हो जिसके उपर,

उसे कोई भी चिंता सताती नहीं,

जिसके सर पे तेरा हाथ सदा रहे भोले नाथ,

जिसके सर पे तेरा हाथ सदा रहे भोले नाथ…..

देव दानव दोनों तेरा वंदन करे,

हाँ हाँ वंदन करे तेरा वंदन करे,

तीनो लोक तेरा अभिनंदन करे,

अभिनंदन करे ओ अभिनंदन करे,

महा दानी तू ही सबकी झोली भरे,

मांगे पंकज रितेश बाबा देदो आशिस,

तेरी आराधना भी मुझको आती नहीं,

जिसके सर पे तेरा हाथ सदा रहे भोले नाथ,

जिसके सर पे तेरा हाथ सदा रहे भोले नाथ…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।