दूर दूर से कावड़ ले कर

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

दूर दूर से कावड़ लेकर चलते नंगे पाँव,

कहत बम बम भोले,

दूर दूर से कावड़ लेकर चलते नंगे पाँव,

कहत बम बम भोले,

कहत बम बम भोले कहत बम बम भोले,

कहत बम बम भोले जपत बम बम भोले,

दूर दूर से कावड़ लेकर चलते नंगे पाँव,

कहत बम बम भोले,

दूर दूर से कावड़ लेकर चलते नंगे पाँव,

कहत बम बम भोले....

अपने भोले बाबा को क्या मैं चढ़ाऊ,

क्या मैं चढ़ाऊ,

अपने भोले बाबा को क्या मैं चढ़ाऊ,

क्या मैं चढ़ाऊ,

कावरिया कावड़ में गंगाजल भर लाये,

कहत बम बम भोले,

दूर दूर से कावड़ लेकर चलते नंगे पाँव,

कहत बम बम भोले....

अपने भोले बाबा को कैसे मनाऊ,

कैसे मैं मनाऊ,

अपने भोले बाबा को कैसे मनाऊ,

कैसे मैं मनाऊ,

सावन सोमवार अभिषेक में दूध की धार बहाओ,

कहत बम बम भोले,

दूर दूर से कावड़ लेकर चलते नंगे पाँव,

कहत बम बम भोले....

अपने भोले बाबा को कैसे रिझाऊ,

कैसे मैं रिझाऊ,

अपने भोले बाबा को कैसे रिझाऊ,

कैसे मैं रिझाऊ,

प्रेम से ग्यारह बैल की पाती शिव को भेट चढ़ाओ,

कहत बम भोले,

दूर दूर से कावड़ लेकर चलते नंगे पाँव,

कहत बम बम भोले....

अपने भोले बाबा को क्या मैं खिलाऊ,

क्या मैं खिलाऊ,

अपने भोले बाबा को क्या मैं खिलाऊ,

क्या मैं खिलाऊ,

संजो बढियन भोग लगावे भंगिया कई कई पाँव,

दूर दूर से कावड़ लेकर चलते नंगे पाँव,

कहत बम बम भोले.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।