गौरा झूला झूल रही भोले नाथ संग

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय जय शिव जय गौरा जय जय शिव जय गौरा....

सावन की बरसे रिमझिम फुहारा पेड़ो पे फूलो की लगी कतार,

सावन की बरसे रिमझिम फुहारा पेड़ो पे फूलो की लगी कतार,

गौरा झूला झूल रही भोले नाथ संग,

गौरा झूला झूल रही भोले नाथ संग,

मईया झूला झूल रही भोले नाथ संग....

कुहू कुहुकती है कोयल पिहं पिहं पपीहा पुकारे,

कुहू कुहुकती है कोयल पिहं पिहं पपीहा पुकारे,

भोले दानी के दर्शन करने भक्त हजारो पधारे,

झूलन की रुत आयी गौरा झूला झूल रही भोले नाथ संग,

गौरा झूला झूल रही भोले नाथ संग,

मईया झूला झूल रही भोले नाथ संग,

जय जय शिव जय गौरा जय जय शिव जय गौरा....

भोले बाबा के डमरू में नंदी गणपत भी झूम रहे है,

भोले बाबा के डमरू में नंदी गणपत भी झूम रहे है,

बादलो को भी देखो इन पर कैसे मोती ये बरसा रहे है,

पवन चले पुरवाई गौरा झूला झूल रही भोले नाथ संग,

गौरा झूला झूल रही भोले नाथ संग,

मईया झूला झूल रही भोले नाथ संग……..

देवता भी संग में आज होकर मगन नाचते है,

देवता भी संग में आज होकर मगन नाचते है,

हाथ जोड़ इनसे आशीर्वाद सब मांगते है,

महिमा ये गाये जाए गौरा झूला झूल रही भोले नाथ संग,

गौरा झूला झूल रही भोले नाथ संग,

मईया झूला झूल रही भोले नाथ संग,

मईया झूला झूल रही भोले नाथ संग.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।