भोले जी नाचे है सावन में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले जी नाचे है सावन में,

पार्वती भी संग में नाचे,

शम्भू के संग श्रृष्टि नाचे,

शंकर बसे नाम रावण में,

भोले जी नाचे है सावन में....

ब्रम्हा जी ब्रम्ह लोक से आये,

विष्णु जी वैकुण्ठ छोड़ के आये,

स्वर्ग पाताल नरक सारे ही,

भोले जी कि महिमा गाये,

बम बम भोले का नाद बजाकर,

नंदी नाचे सावन में,

भोले जी नाचे है सावन में....

कावड़ीयो के घाव देखकर,

कावड़ का ये चाव देखकर,

पक्षी पेड़ फुल भी देखो,

झूम रहे है कावड देखकर,

हर चेला मेरे भोले नाथ का,

झूम रहा है सावन में,

भोले जी नाचे है सावन में.....

महाशिवरात्रि पावन है आई,

होनि है भोले कि देखो सगाई,

गले नाग भी साथ में नाचे,

भुत प्रेत पिशाच भी नाचे,

धरती और अम्बर भी नाचे,

नाचे दुनिया सावन में,

भोले जी नाचे है सावन में.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।