झूला झूले जनक दुलारी झूला रहे अवध बिहारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन राम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सावन की घटा घनघोर की रिमझिम बरसे चारों ओर,

झूला झूले जनक दुलारी झूला रहे अवध बिहारी.....

श्यामल श्यामल राम हमारे,

गौर वरन है सिया हमारी,

जैसे चंदा और चकोर की रिमझिम,

सावन की घटा घनघोर की रिमझिम बरसे चारों ओर,

झूला झूले जनक दुलारी झूला रहे अवध बिहारी.....

राम का भीगे पीला पीताम्बर,

सीता की भीगे रेशम साड़ी,

सखी मन में उठे हिलोर की रिमझिम,

सावन की घटा घनघोर की रिमझिम बरसे चारों ओर,

झूला झूले जनक दुलारी झूला रहे अवध बिहारी.....

दादूर मोर पपीहा बोले,

पीहू पीहू की बोली बोले,

सब मिलके मचावे शोर की रिमझिम,

सावन की घटा घनघोर की रिमझिम बरसे चारों ओर,

झूला झूले जनक दुलारी झूला रहे अवध बिहारी.....

सावन का आया मस्त महीना,

हरियाली से भरा हर कोना,

सबके गावे मिलके मल्हार की रिमझिम,

सावन की घटा घनघोर की रिमझिम बरसे चारों ओर,

झूला झूले जनक दुलारी झूला रहे अवध बिहारी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।