रतना रे जा ल्या सुगना ने

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

रतना रे जा ल्या सुगना ने,

कदे न आई वा त्योहारा ने....

गांव न जाणु नाम न जाणु,

सुरत न जाणु सिरदारा री,

गांव पुंगलगढ नाम रतन सिंह,

सांवली सुरत सिरदारा री,

रतना रे जा ल्या सुगना ने,

कदे न आई वा त्योहारा ने....

घर मे घणा रे उटाऊ रतना,

कमी नही असवारा री,

दे विश्वास बेगो जासी,

ठा पडसी समाचारा री,

रतना रे जा ल्या सुगना ने,

कदे न आई वा त्योहारा ने....

नरमाई सु बात करिजे,

ध्यान राख हुंकारा री,

हुंडा कैसी तू रीस मत करीजे,

करसी रे बात गिवारा री,

रतना रे जा ल्या सुगना ने,

कदे न आई वा त्योहारा ने....

मत ना बदी उडाईजे रतना,

लाज है दो परीवारा री,

भीड पडे तो याद करीजे,

साई करा मे थारोडी,

रतना रे जा ल्या सुगना ने,

कदे न आई वा त्योहारा ने....

डाली हरजी भज्या रेअलख ने,

बात चले भवपारा री,

पन्नालाल प्रेमी गुण गावे,

बडी बात अवतारा री,

रतना रे जा ल्या सुगना ने,

कदे न आई वा त्योहारा ने....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।