भूतनाथ जै भूतेश्वर हैं नाथ हमारे काशी में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भूतनाथ जै भूतेश्वर हैं नाथ हमारे काशी में।

घंघनात घन घन घंटा नित सांझ सकारे काशी में ॥

त्रिशूलधारी शिव भोले का हाल भला है क्या कहना ।

बम बम हर हर महादेव नित सांझ सकारे काशी में ॥

हैं आप दयालु दयानाथ जै कालेश्वर जै भलेश्वर ।

त्र्यलोक से यह पावन नगरी है निज हाथ सवारे काशी में॥

हैं त्रिशूल पर यह शिवजी के जिसका वर्णन ग्रंथो में है ।

देवो के देव है महादेव भक्तों के प्यारे काशी में॥

ग्रीवब्याल सर गंग भाल कलोंकेकाल हैं सर्वेश्वर ।

अम्बिका हमेशा रहते हैं आपके सहारे काशी में ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।