तुम तो भोलेनाथ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तुम तो भोलेनाथ हो भंगिया पी के भूल जाते हो.

रोज रोज भोले तुम जो ऐसा करोगे ओ हो,

भक्तो को दर्शन तुम कैसे दोगे भोले....

तुम तो भोलेनाथ हो भंगिया पी के भूल जाते हो,

रोज रोज भोले तुम जो ऐसा करोगे ओ हो,

कन्या को घर वर कैसे दोगे भोले,

तुम तो भोलेनाथ हो भंगिया पी के भूल जाते हो.....

तुम तो भोलेनाथ हो भंगिया पी के भूल जाते हो,

रोज रोज भोले तुम जो ऐसा करोगे ओ हो,

बाँझन को पुत्र तुम कैसे दोगे भोले,

तुम तो भोलेनाथ हो भंगिया पी के भूल जाते हो.....

तुम तो भोलेनाथ हो भंगिया पी के भूल जाते हो,

रोज रोज भोले तुम जो ऐसा करोगे ओ हो,

अंधे को नैन तुम कैसे दोगे भोले,

तुम तो भोलेनाथ हो भंगिया पी के भूल जाते हो....

तुम तो भोलेनाथ हो भंगिया पी के भूल जाते हो,

रोज रोज भोले तुम जो ऐसा करोगे ओ हो,

निर्धन को माया फिर कैसे दोगे भोले,

तुम तो भोलेनाथ हो भंगिया पी के भूल जाते हो….

तुम तो भोलेनाथ हो भंगिया पी के भूल जाते हो,

रोज रोज भोले तुम जो ऐसा करोगे ओ हो,

कोढ़ी को काया तुम कैसे दोगे भोले,

तुम तो भोलेनाथ हो भंगिया पी के भूल जाते हो....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।