देखो नंदी पे चढ़के आया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

देखो नंदी पे चढ़के आया भोले बाबा ने ब्याह रचाया.....

ना टाई ना सूट ना पैरो में बूट,

मृगछाला पहनके आया भोले बाबा ने ब्याह रचाया,

देखो नंदी पे चढ़के आया भोले बाबा ने ब्याह रचाया……

सिर पे लंबी लटा जैसे काली घटा,

नागों का हार बनाया भोले बाबा ने ब्याह रचाया,

देखो नंदी पे चढ़के आया भोले बाबा ने ब्याह रचाया.....

लाए किस किस को साथ भोले नाथ,

भूतों की टोली लाया भोले बाबा ने ब्याह रचाया,

देखो नंदी पे चढ़के आया भोले बाबा ने ब्याह रचाया.....

सखियों गौरा से कहे भोले मन में हसे,

ये कैसा दूल्हा आया भोले बाबा ने ब्याह रचाया,

देखो नंदी पे चढ़के आया भोले बाबा ने ब्याह रचाया.....

गौरा ढोलक बजाए भोला डमरू बजाए,

देखो मिलन का समय है आया भोले बाबा ने ब्याह रचाया,

देखो नंदी पे चढ़के आया भोले बाबा ने ब्याह रचाया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।