भोला पर्वत वाला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बम बबम बम बबम बम बबम,

जय जय शंकर जय जय शंकर,

बम भोले शंकर बम भोले शंकर.....

क्यूँ ढूढ़ रहा तू भोले को,

शिव तुझमे समाये बैठे है,

वो भोला पर्वत वाला है,

तेरे मन में बसा शिवलाय है....

बम बबम बम बबम बम बबम,

जय जय शंकर जय जय शंकर,

बम भोले शंकर बम भोले शंकर………

दुनिया के बंधन झूठे है,

तेरे अपने तुझसे रूठे है,

तू ॐ नाम का जाप कर,

सारे दुःख तेरे हर लेंगे शंकर,

सारे संकट काटेंगे शंकर,

उसकी ही माया सारी,

वोही काज सबके संवारेंगे,

वो भोला पर्वत वाला है,

तेरे मन में बसा शिवलाये है…….

बम बबम बम बबम बम बबम,

जय जय शंकर जय जय शंकर,

बम भोले शंकर बम भोले शंकर………

तेरे मन की सारी माया है,

तेरे लोभ ने तुझको खाया है,

तुझको कैसे मिलेंगे शिव शंकर,

तेरे मन के अंदर पाप का साया है……..

तू प्रीत लागले भोले से,

शिव कण कण में समाये है,

वो भोला पर्वत वाला है,

तेरे मन में बसा शिवलाये है…

बम बबम बम बबम बम बबम,

जय जय शंकर जय जय शंकर,

हर हर शंकर हर हर शंकर….

क्यों दर बा दर तू फिरता है,

ये तालाब ही तेरी दुश्मन है,

वो बैठा ऊपर देख रहा,

किसने क्या पाप किए,

वो भोला पर्वत वाला है,

तेरे मन में बसा शिवलाये है……..

बम बबम बम बबम बम बबम,

जय जय शंकर जय जय शंकर,

हर हर शंकर हर हर शंकर…….

क्यूँ ढूढ़ रहा तू भोले को,

शिव तुझमे समाये बैठे है,

वो भोला पर्वत वाला है,

तेरे मन में बसा शिवलाये है………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।