शिव की भीगे कावड़िया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सावन की बरसे बदरिया शिव की भीगे कावाड़िया,

भीगे कावड़िया, शिव की भीगे कावड़िया.....

नील कंठ में शिव जी का डेरा,

कैसे चढ़ूँ पैर फिसले है मेरा,

टेढ़ी मेढ़ी डगरिया, शिव की भीगे कावड़िया….

छाई हरियाली झूमे अंबुवा की डाली,

होके मतवाली कूके कोयलिया काली,

चमके डगर में बिज़ूरिया, शिव की भीगे कावड़िया….

काली घटा काली भर भर आयी,

गंगा जल से शिवलिंग नहलायी,

भक्तों पे भोले की नज़रिया, शिव की भीगे कावड़िया….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।