मेरे भोले तू मन के द्वार खोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव शिवाय, शिव शिवाय,

शिव शिवाय, शिव शिवाय,

नीली महिका और नीलकंठ नाद,

चंद्र माथे और डमरुँ पकडे हाथ,

सोम तारे जो वो है भोला नाथ,

मेरे भोले, तू मन के द्वार खोले...

जो तेरा नाम ले ले,

तुझसे ही पार होले,

इस नैया में सवार,

मेरे भोले, तू मन के द्वार खोले,

जो तेरा नाम बोले,

हो भव से जाए पार,

मेरे भोले तू मन के द्वार खोले,

तुझसे ही पार होले,

इस नैया में सवार,

मेरे भोले, तू मन के द्वार खोले,

जो तेरा नाम बोले,

हो भव से जाए पार,

शिव शिवाय शिव शिवाय

शिव शिवाय शिव शिवाय.....

शिव पुराण पढूं अगम,

या नहलाओ शिव लिंग,

बेल चढ़ाऊँ रहूं निराहर,

मंत्र जपूँ हर दिन,

धतूरा या कमला का गट्टा,

मंदार या बेल का पत्ता,

कर जाऊँ तीरथ कोई तेरे धाम,

जटाधारी महेश त्रिपुरारी,

गंगा को धरा पे लाये,

आकाश से उतार,

मेरे भोले तू मन के द्वार खोले,

जो तेरा नाम बोले,

हो भव से जाए पार,

मेरे भोले तू मन के द्वार खोले,

जो तेरा नाम ले ले

तुझसे ही पार होले,

इस नैया में सवार,

शिव शिवाय शिव शिवाय

शिव शिवाय शिव शिवाय.....

तम समाये, राख चढ़ाये,

और गौरी माँ है संग,

नमः शिवाय, दिगंबराये नमः,

रूद्र अवतार बजरंग,

तन मन है मेरा जीवन,

कर जाऊँ तुझे अर्पण,

है योगी मेरा सब कुछ तेरे नाम,

नटराज त्रिशूल डमरुँ साजा,

तांडव से तेरे काँपा सारा संसार,

नटराज त्रिशूल डमरुँ साजा,

तांडव से तेरे काँपा सारा संसार,

मेरे भोले तू मन के द्वार खोले,

जो तेरा नाम बोले,

हो भव से जाए पार,

मेरे भोले तू मन के द्वार खोले,

जो तेरा नाम ले ले,

तुझसे ही पार होले,

इस नैया में सवार,

शिव शिवाय शिव शिवाय

शिव शिवाय शिव शिवाय.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।