सानु पता तू बदल सकदा है,साडे हाथा दिया लकीरा नु

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॥ पावन पाठ ॥

तू ही तू तू ही तू

कर किरपा मेहरा दिया साईंया,

कट दुखा दिया जंजीरा नु सानु पता तू बदल सकदा है,

साडे हाथा दिया लकीरा नु साडे मथे दीया लकीरा नु,

हूँ हर कोई खुशिया ही माने,

किते दुःख गरीबी आवे ना,

देयो मौज बहरा सबना नु जींद कोई वि कुर्लावे न,

हूँ खेर झोली विच पा दियो नी तेरे दर ते खड़े फकीर नु,

सानु पता तू बदल सकदा है,

साडे हाथा दिया लकीरा नु......

असी कखा वांगु रुल्दे सी तू चुक सीहने नाल लाया है,

दीदार करा के मौला दे सहनु सिर दे ताज बनाया है,

तेरी एहे सोगात कदे भूलिए न,

काम औनी जो आखिरा नु,

सानु पता तू बदल सकदा है,

साडे हाथा दिया लकीरा नु

दरबार नसीबा दा खुला सूते होए भाग जगा दियो जी

सब रोने थोने मूक जा वन सुखा दी छेह बरला दियो जी,

करो करम एजेहा साड़े ते चमका दियो जी तकदीरा नु,

सानु पता तू बदल सकदा है,

साडे हाथा दिया लकीरा नु

सत्संग सेवा सिमरन करिये ते भगती दा वि दान दियो,

तेरे गुण सागर लिख गोंदा है सुर कलम च एह्सी जान दियो,

तू बरम ज्ञान दा सागर है तू ही तारिया बुले मीरा नु,

सानु पता तू बदल सकदा है,

साडे हाथा दिया लकीरा नु

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।