श्री शिवाय नमस्तुभयम 108 बार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

आत्मशांती बल देने वाला श्री शिवाय नमस्तुभयं

तन मन पावन करने वाला श्री शिवाय नमस्तुभयं

भव से पार लगाने वाला श्री शिवाय नमस्तुभयं

संकट सबके हरने वाला श्री शिवाय नमस्तुभयं

अकाल मृत्यू को हरने वाला श्री शिवाय नमस्तुभयं

मोक्ष मुक्ति को देने वाला श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

चारों वेद पुरान भी बोले श्री शिवाय नमस्तुभयं

ब्रह्म विष्णु नारद बोले श्री शिवाय नमस्तुभयं

मुरलीधर की मुरली बोले श्री शिवाय नमस्तुभ्यं

गंगा रेवा शिप्रा बोले श्री शिवाय नमस्तुभयं

पंडित प्रदीप मिश्रा जी बोले श्री शिवाय नमस्तुभयं

शिव शक्ति परिवार भी बोले श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभ्यं

जिसने ये ब्राह्मण्ड रचाया श्री शिवाय नमस्तुभयं

जिसका कोई पार ना पाया श्री शिवाय नमस्तुभयं

हर कण कण मे शिव हि समाया श्री शिवाय नमस्तुभयं

शिव हि शक्ति सब झुठी माया श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभ्यं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

श्री शिवाय नमस्तुभयं श्री शिवाय नमस्तुभयं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।