देख सखी भोला की आगई बारात

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

देख सखी भोला की आ गई बारात,

रस बारी के भौंरा रे,

भौंरा रे भौंरा रे, आ गई बारात,

रास बारी के भौंरा रे,

देख सखी भोला की....

राजा हिमांचल ने मंडप डराऐ,

रस बारी के भौंरा रे..

दस हजार हाथ लंबे चौड़े डराऐ,

रास बारी के भौंरा रे...

हीरा और मोती के पत्ता चढ़वाए,

रस बारी के भौंरा रे...

गज मोतीयों के चौंक पुरवाऐ,

रस बारी के भौंरा रे...

ब्रह्मा विष्णु नारद और देवता भी आए.

रस बारी के भौंरा रे...

भोले बाबा पार्वती व्याहने को आए,

रस बारी के भौंरा रे...

Ramkrishan yadav

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।