सर पे छतरी है श्याम की

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बारिश का डर ना धुप का,

सर पे छतरी है श्याम की,

हम छतरी ले निकल पड़े,

हाथों में श्याम नाम की,

बारिश का डर ना धूप का,

सर पे छतरी है श्याम की.....

जब सांवरा है साथ में,

हम क्यों फ़िक्र करें,

जब जीत अपने हाथ है,

फिर किसलिए डरे,

आंधी हो या तूफ़ान हो,

या गम का रेगिस्तान हो,

छतरी है ये आराम की,

बारिश का डर ना धूप का,

सर पे छतरी है श्याम की....

पहचान हम सभी की है,

बाबा के नाम से,

जाना नहीं है दूर अब,

खाटू के धाम से,

जाना नहीं है और दर,

बाबा के दर को छोड़ कर,

अंगुली ना छोड़े श्याम की,

बारिश का डर ना धूप का,

सर पे छतरी है श्याम की....

सब कुछ हमारा श्याम है,

कोई और कुछ नहीं,

अब तो हमारे वास्ते,

कहीं और कुछ नहीं,

चलना सिखाया श्याम ने,

जीना सिखाया श्याम ने,

दी जिंदगी आराम की,

बारिश का डर ना धूप का,

सर पे छतरी है श्याम की....

बारिश का डर ना धुप का,

सर पे छतरी है श्याम की,

हम छतरी ले निकल पड़े,

हाथों में श्याम नाम की,

बारिश का डर ना धूप का,

सर पे छतरी है श्याम की....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।