मैं हथ बन बन अरज करा

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॥ पावन पाठ ॥

मैं हथ बन बन अरज करा,

ऐसी कोई रात बना जोगी,

बस तू ते मैं होइए ऐसी मुलाकात बना जोगी,

मैं हाथ बन बन...

मैं तेरे पैरी हथ लावा,

तू हथ सिर ते टिक्का देवे,

मैं तैनू देख के रो पवा,

तू मैंनू सीने ला लवे

तू अपने हथी रोट बना,

मैंनू दवे खवा जोगी,

मैं हाथ बन बन...

तू मेरा हथ फड़ के आखें,

तेरा परिवार किदा पीछे,

मैं वि प्यार नाल पूछ ला,

जोगी जी रहने हो किथै,

तू करके इशारा जन्नत वल,

दवे गुफा दिखा जोगी,

मैं हाथ बन बन...

बाबा अपने मौर् नाल,

मेरी पहचान करा देवी,

गौतम घर जाना बार बार,

एहनु गल समझा देवी,

तुहाडा मोर पूछे मेरे घर दा पता,

मैं दवा राह समझा जोगी,

मैं हाथ बन बन...

मेरा ख्वाब हकीकत कर देवो,

कुछ होर ना चावा मैं,

तेरा होके जिन्ना मैं जोगी,

तेरा हो मर जावा मैं,

तैनू शिव शंकर जी ने अपनाया,

तू मैनु उंझ अपना जोगी,

साडा ते तरला ए,

ऐसी रात बना जोगी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।