नज़दीक मेरे आने से आफ़त घबराती है

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॥ पावन पाठ ॥

नज़दीक मेरे आने से आफ़त घबराती है,

मेरे सर पे झुंझनवाली की चुनड़ी लहराती है,

नज़दीक मेरे आने से आफ़त घबराती है,

मेरे सर पे झुंझनवाली की चुनड़ी लहराती है,

चाहें लाख़ मुसीबत आये चाहें छाए गम के बादल,

मुझकों चिंता है कैसी मेरे सर पे माँ का आँचल,

अपने भक्तों को दुःख में माँ देख ना पाती है,

मेरे सर पे झुंझनवाली की चुनड़ी लहराती है,

मैं थाम के माँ पल्ला चलता हूँ पीछे-पीछे,

मैं तो हूँ किस्मत वाला रहता हूँ चुनड़ी के नीचे,

मुझे गोद बिठा के मईया सर पे हाथ फिराती है,

मेरे सर पे झुंझनवालीकी चुनड़ी लहराती है,

हमने तो इतना जाना जब से है होस सम्भाला,

एक माँ ने जन्म दिया और एक माँ ने हमको पाला,

संकट आने से पहले दादी खुद आ जाती है,

माँ खुद आ जाती है ,

मेरे सर पे झुंझनवाली की चुनड़ी लहराती है,

नज़दीक मेरे आने से आफ़त घबराती है,

मेरे सर पे झुंझनवाली की चुनड़ी लहराती है,

भजन गायक :- सौरभ-मधुकर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।