भोलेनाथ की दीवानी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आँख तीसरी खोले है,

ब्रह्माण्ड ये सारा बोले है,

हर हर माला जपते जो,

कष्ट हरते मेरे भोले हैं,

अजर अमर अविनाशी वो,

कृपा सिंधु औघड़दानी,

भोलेनाथ की दीवानी, मैं हूँ नाथ की दीवानी,

भोलेनाथ की दीवानी....

रूद्र रूपाय ॐ नमः शिवाय,

एक बार जो दर्शा दिखाए,

मोह माया फिर लगती झूठी,

जो शम्भू में लीन हो जाए,

मस्तक पे चाँद त्रिशूल,

हाथ में महादेव की निशानी,

भोलेनाथ की दीवानी, मैं हूँ नाथ की दीवानी,

भोलेनाथ की दीवानी.....

आँख तीसरी खोले है,

ब्रह्माण्ड ये सारा बोले है,

हर हर माला जपते जो,

कष्ट हरते मेरे भोले हैं,

अजर अमर अविनाशी वो,

कृपा सिंधु औघड़दानी,

भोलेनाथ की दीवानी, मैं हूँ नाथ की दीवानी,

भोलेनाथ की दीवानी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।