शिव शंकर मन मुस्काए

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले बाबा मन मुस्काए भंवरिया मेरी गौरा से पड़े....

पहली भामर कैसे पड़ेगी एक पुरुष दो नार,

भोले बाबा समझ गए तो गंगा को दिया है उतार,

भंवरिया मेरी गौरा से पड़े....

दूजी भामर कैसे पड़ेगी दो है पुरुष एक नार,

भोले बाबा समझ गए तो चंदा को दिया है उतार,

भंवरिया मेरी गौरा से पड़े....

तीजी भावर कैसे पड़ेगी दो है पुरुष एक नार,

भोले बाबा समझ गए तो नागों को दिया है उतार,

भंवरिया मेरी गौरा से पड़े....

चौथी भावर कैसे पड़ेगी कोई बाजा नाए,

भोले बाबा समझ गए तो डमरु को दिया है बजाए,

भंवरिया मेरी गौरा से पड़े....

पांचवी भावर कैसे पड़ेगी कोई बराती नाए,

भोले बाबा समझ गए तो देवों को लिया है बुलाए,

भंवरिया मेरी गौरा से पड़े....

छठवी भावर कैसे पड़ेगी कोई पंडित नाए,

भोले बाबा समझ गए तो ब्रह्मा को लिया है बुलाए,

भंवरिया मेरी गौरा से पड़े....

सातवीं भावर कैसे पड़ेगी कोई सवारी नाए,

भोले बाबा समझ गए तो नंदी को लिया है बुलाए,

भंवरिया मेरी गौरा से पड़े....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।