कावड़ियों का लग गया मेला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बोलिये शंकर भगवान की जय हो...

कावड़ियों का लग गया मेला भोले का रंग केसरिया,

भोले का रंग केसरिया भोले का रंग केसरिया,

हरिद्वार में लग गया मेला भोले का रंग केसरिया,

आया सावन का मस्त महीना भोले का रंग केसरिया....

गौरा मैया तो टीके वाली,

टीके वाली वो तो बिंदिया वाली,

मेरा भोला तो गंगा वाला भोले का रंग केसरिया,

कावड़ियों का लग गया मेला भोले का रंग केसरिया,

हरिद्वार में लग गया मेला भोले का रंग केसरिया....

गौरा मैया तो झुमको वाली,

झुमको वाली मैया नथनी वाली,

मेरा भोला तो गंगा वाला भोले का रंग केसरिया,

कावड़ियों का लग गया मेला भोले का रंग केसरिया,

हरिद्वार में लग गया मेला भोले का रंग केसरिया…..

गौरा मैया तो हारो वाली,

हारो वाली वो तो माला वाली,

मेरा भोला तो गंगा वाला भोले का रंग केसरिया,

कावड़ियों का लग गया मेला भोले का रंग केसरिया,

हरिद्वार में लग गया मेला भोले का रंग केसरिया….

गौरा मैया तो चुडे वाली,

चुडे वाली वो तो मेहँदी वाली,

मेरा भोला तो गंगा वाला भोले का रंग केसरिया,

कावड़ियों का लग गया मेला भोले का रंग केसरिया,

हरिद्वार में लग गया मेला भोले का रंग केसरिया….

गौरा मैया तो लहंगा वाली,

लहंगा वाली वो तो चुनर वाली,

मेरा भोला तो गंगा वाला भोले का रंग केसरिया,

कावड़ियों का लग गया मेला भोले का रंग केसरिया,

हरिद्वार में लग गया मेला भोले का रंग केसरिया….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।