अब भज दादी दादी दादी यहीं काम आवेंगी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन रानी सती दादी भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अब भज दादी

अब भज दादी दादी दादी यहीं काम आवेंगी

काम आवेंगी की भव से पार लगावेंगी

अब भज दादी

जय हो

अब भज दादी दादी दादी यहीं काम आवेंगी

नमो नमो हे नारायणी माँ नमो नमो झुंझनवाली

नमो नमो हे जगजन्ननी माँ नमो नमो दुर्गा काली

जय दादी जय दादी जपले रे मन जय दादी

अब भज दादी

अब भज दादी दादी दादी यहीं काम आवेंगी

काम आवेंगी विपत के जाल नसावेंगी

तो अब भज दादी

जय हो

अब भज दादी दादी दादी यहीं काम आवेंगी

नमो नमो हे तनधन संगिनी नमो नमो हे राणीसती

नमो नमो गुरुसामल नंदिनी नमो नमो हे आदिसती

जय दादी जय दादी जपले रे मन जय दादी

अब भज दादी

अब भज दादी दादी दादी यहीं काम आवेंगी

काम आवेंगी की आवागमन छुड़ावेंगी

तो अब भज दादी

जय हो

अब भज दादी दादी दादी यहीं काम आवेंगी

नमो नमो हे राणा पूजिता नमो नमो महापतिव्रता

नमो नमो झड्चंद्र स्न्घारिणी नमो नमो शक्तिरूपा

जय दादी जय दादी जपले रे मन जय दादी

अब भज दादी

अब भज दादी दादी दादी यहीं काम आवेंगी

काम आवेंगी की झुंझनु धाम बुलावेंगी

तो अब भज दादी

जय हो

अब भज दादी दादी दादी यहीं काम आवेंगी

भजन गायक :- सौरभ-मधुकर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।