गौरा रानी के रसीले नैना

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गौरा रानी के रसीले नैना भोले से लड़े,

भोले से लड़े भोले बाबा से लड़े…..

डम डम डम डमरू बाजे भोले भण्डारी का,

गौरा रानी की प्यालियाँ में घुँघरू हैं जड़े,

गौरा रानी के रसीले नैना भोले से लड़े…..

मेरे भोले भण्डारी की जटा में गंगा बहती,

गौरा रानी की नथनियाँ में हीरे हैं जड़े,

गौरा रानी के रसीले नैना भोले से लड़े…

मेरे भोले भण्डारी के गल सर्पों की माला,

गौरा रानी हरवे में हीरे मोती हैं जड़े,

गौरा रानी के रसीले नैना भोले से लड़े…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।