तुम अगर द्वार भोले के आते रहो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तुम अगर द्वार भोले के आते रहो,

काम जो भी हैं बिगड़े सुधर जाएंगे,

बाबा शिव को पुकारा जो मन से कभी,

जो खजाने है खाली वो भर जाएंगे,

तुम अगर द्वार भोलें के आते रहो,

काम जो भी हैं बिगड़े सुधर जाएंगे….

बाबा भोले की भक्ति है सबसे सरल,

जो किसी देव देवी में पाई नहीं,

कौन ऐसा अभागा है संसार है,

जिसने शिवजी की महिमा को गाई नहीं,

सोचने में समय तेरा जाता रहा,

तो सुहाने ये पल भी गुजर जाएँगे,

तुम अगर द्वार भोलें के आते रहो,

काम जो भी हैं बिगड़े सुधर जाएंगे……

सोना चांदी तो बाबा नहीं मांगते,

भाव से गंगा जल ही चढ़ा दीजिये,

फुल फल भी चढाने से मजबूर हो,

हाथ चरणों के आगे बढ़ा दीजिये,

बाबा ऐसे दयालु है भक्तो सुनो,

जो भी संकट तुम्हारे है टल जाएँगे,

तुम अगर द्वार भोलें के आते रहो,

काम जो भी हैं बिगड़े सुधर जाएंगे……

जिनके होंठों पे शिव शिव का उच्चार है,

उनके जीवन में देखा चमत्कार है,

उनके चरणों में जा अब तू देरी ना कर,

वो ही दातार सच्चा मददगार है,

सबकी बिगड़ी बनाते है भोले सदा,

तेरी बिगड़ी को क्या वो मुकर जाएँगे,

तुम अगर द्वार भोलें के आते रहो,

काम जो भी हैं बिगड़े सुधर जाएंगे…

तूने शाश्त्र पढ़े तूने वेद पढ़े,

शाश्त्र पढके भी तूने ये सोचा नहीं,

तूने शाश्त्र पढ़े तूने वेद पढ़े,

शाश्त्र पढके भी तूने ये सोचा नहीं,

भोला बाबा के दर पे तू आके तो देख,

तेरे सारे ही संकट तो मिट जाएँगे,

तुम अगर द्वार भोलें के आते रहो,

काम जो भी हैं बिगड़े सुधर जाएंगे….

भोलेनाथ के चरणों में चारों धाम है,

आजा आजा यही भक्ति का धाम है,

भोलेनाथ के चरणों में चारों धाम है,

आजा आजा यही भक्ति का धाम है,

डमरू वाले की पूजा की ही नहीं,

फिर तीर्थो में क्यों कर हम जाएँगे,

तुम अगर द्वार भोलें के आते रहो,

काम जो भी हैं बिगड़े सुधर जाएंगे…..

तू भटकता है दर दर परेशान क्यों,

तेरी मुश्किल का बाबा को अहसास है,

मुझको काशी निवासी पे विश्वास है,

वो रहता सदा भक्त के पास है,

शिव का सुमिरण जो भक्तगण करते सदा,

भक्त भोले के भव से भी तर जाएँगे,

तुम अगर द्वार भोलें के आते रहो,

काम जो भी हैं बिगड़े सुधर जाएंगे….

तुम अगर द्वार भोले के आते रहो,

काम जो भी हैं बिगड़े सुधर जाएंगे,

बाबा शिव को पुकारा जो मन से कभी,

जो खजाने है खाली वो भर जाएंगे,

तुम अगर द्वार भोलें के आते रहो,

काम जो भी हैं बिगड़े सुधर जाएंगे….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।