कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी,

भोले पैदल चले आ रहे है……

उनकी जटा में गंगा विराजे,

वो बहाते चले आ रहे है,

उनके माथे पे चंदा विराजे,

वो चमकाते चले आ रहे है,

कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी,

भोले पैदल चले आ रहे है….

उनके कानो में बिच्छु विराजे,

वो लटकाते चले आ रहे है,

उनके गले में नाग विराजे,

वो लहराते चले आ रहे है,

कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी,

भोले पैदल चले आ रहे है…

उनके हाथो में डमरू विराजे ,

वो बजाते चले आ रहे है,

उनके अंगो में बाघम्बर छाला,

वो पहन कर चले आ रहे है,

कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी,

भोले पैदल चले आ रहे है….

उनके पैरो में घुघरू विराजे,

वो बजाते चले आ रहे है,

उनके संग में गौर मैया सोहे,

जोड़ी बना कर चले आ रहे है,

कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी,

भोले पैदल चले आ रहे है…..

उनके चरणों में नंदी विराजे,

वो घुमाते चले आ रहे है,

कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी,

भोले पैदल चले आ रहे है……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।