कहाँ चले भोलेनाथ

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

नशे में झूम के तुम कहाँ चले भोलेनाथ.....

अकेला मैं नहीं मेरे सर पर गंगा साथ,

नशे में झूम के तुम कहाँ चले भोलेनाथ....

अकेला में नहीं मेरे संग में है चंदा साथ,

नशे में झूम के तुम कहाँ चले भोलेनाथ…..

अकेला मैं नहीं मेरी गोदी में गणपति साथ,

नशे में झूम के तुम कहाँ चले भोलेनाथ....

अकेला मैं नहीं मेरे संग में गौरा साथ,

नशे में झूम के तुम कहाँ चले भोलेनाथ....

अकेला मैं नहीं मेरे संग में सारा संसार,

नशे में झूम के तुम कहाँ चले भोलेनाथ ….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।