बनवा दे भोले सोने की एक अटरिया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बनवा दे भोले सोने की एक अटरिया,

तुम तो भोला अस्सी बरस के मेरी बली उमरिया,

बनवा दे भोले सोने की एक अटरिया……..

शिव शंकर ने हुकम किया जब विश्कर्मा बुलवाए,

सोने का तो महल बनाया सोने के खम्ब लगाए ,

इसी सुंदर बनी अटरिया ठहरे नहीं नजरिया,

बनवा दे भोले सोने की एक अटरिया….

महल बना जब सोने का तो हवन यज्ञ करवाया,

रावण जैसा ज्ञानी पंडित पूजन को बुलवाया,

पूजा करते करते पड़ गई रावण की नजरिया,

बनवा दे भोले सोने की एक अटरिया…..

रावण बोला ओ मेरे स्वामी मैं हूं दास तुम्हारा ,

सोने का ये महल आपका लगे बड़ा ही प्यारा,

मुझे दान में देदो भोले सोने की ये अटरिया,

बनवा दे भोले सोने की एक अटरिया....

महल अटारी दान में देकर शिव कैलाश पधारे,

रूंठ के बैठी गौरा मैया शिवजी लगे मनाने,

अपने भाग्य में नहीं है गौरा सोने की अटरिया,

बनवा दे भोले सोने की एक अटरिया.....

शिव शंकर हनुमान बने सीता का पता लगाया,

पूंछ में बैठी गौरा मैया लंका नगर जलाया,

खाख में मिल गई रावण तेरी सोने की अटरिया,

बनवा दे भोले सोने की एक अटरिया…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।