ओ बाबोसा महर करो

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - ओ मैया मेरी विनती सुनो

ओ बाबोसा महर करो, मेरे सिर पर हाथ धरो,

दुख संकट सारे हरो, थोड़ी कृपा की नजर करो,

अरज मेरी स्वीकार करो, मन मंदिर में वास करो,

ओ बाबोसा महर करो....

मुझे तेरा सहारा है, अब दुनिया से क्या लेना,

यही मांगु मैं बस तुमसे, जगह चरणों मे देना,

मुझको अपना प्यार दो, जीवन मेरा संवार दो,

नजरे करम एक बार करो, इतना सा उपकार करो,

ओ बाबोसा महर करो....

अर्जी मेरी, मर्जी तेरी, मुझे तारो न तारो,

मैं जैसी हूँ, हाँ तेरी हूँ, प्रभु बस है तू म्हारो,

दिलबर मुझसे न रूठे, प्रीत की डोर न टुटे,

छगनी नदंन ध्यान धरो, रिया की आशा पूरी करो,

ओ बाबोसा महर करो....

रिया जैन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।