पर्वत पे आजा मेरी गौरा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पर्वत पे आजा मेरी गौरा,

क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी….

मैं कैसे आऊं मेरे भोले,

मेरे ते प्यारी गंगा तन्ने,

तू तो पगली होइ मेरी गौरा,

गंगा मेरी जटा की शोभा स,

पर्वत पे आजा मेरी गौरा,

क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी….

मैं कैसे आऊं मेरे भोले,

मेरे ते प्यारा चाँद तन्ने,

तू तो पगली होइ मेरी गौरा,

चंदा मस्तक की शोभा स,

पर्वत पे आजा मेरी गौरा,

क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी…..

मैं कैसे आऊं मेरे भोले,

ये सरप मेरे ते प्यारे स,

तू तो पगली होइ मेरी गौरा,

ये सरप गले की शोभा स,

पर्वत पे आजा मेरी गौरा,

क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी....

मैं कैसे आऊं मेरे भोले,

तू तो पगली होइ मेरी गौरा,

मेरे ते प्यारा डमरू स,

डमरू मेरे हाथ की शोभा स,

पर्वत पे आजा मेरी गौरा,

क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी.....

मैं कैसे आऊं मेरे भोले,

मेरे ते प्यारा नंदी स,

तू तो पगली होइ मेरी गौरा,

या नंदी मेरी असवारी स,

पर्वत पे आजा मेरी गौरा,

क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी.....

मैं कैसे आऊं मेरे भोले,

मेरे ते भगत तन्ने,

तू तो पगली होइ मेरी गौरा,

भगता ने दर्शन दोनों देवा,

आपां दोनों संकट काटा,

पहाड़ा पर बैठ के भजन करा,

मैं इब आऊं मेरे भोले,

मैं तो बहम करूँ थी खामखा,

मन्ने लगे तन्ने स प्यार घणा,

ईब लगे तन्ने स प्यार घणा…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।