झूले सिया सुकुमारी ना

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

झूला लगे जनक फुलवारी,

झूले सिया सुकुमारी ना ।

काही के डोर काहि का पलना,

काही के डारी ना, सखी हो,

झूला लगे जनक फुलवारी,

झूले सिया सुकुमारी ना ।

रेशम के डोर चंदन का पलना,

अमुआ की डारी ना, सखी हो,

झूला लगे जनक फुलवारी,

झूले सिया सुकुमारी ना ।

के हो झूलत के हो झुलावत,

बारी बारी ना, सखी हो,

झूला लगे जनक फुलवारी,

झूले सिया सुकुमारी ना ।

राम जी झूलत सिया जी झुलावत,

सिया जी झूलत राम जी झुलावत,

बारी बारी ना, सखी हो,

झूला लगे जनक फुलवारी,

झूले सिया सुकुमारी ना ।

Shweta Pandey (Varanasi)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।