डमरू वाले डमरू बजा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

डमरू वाले डमरू बजा,

तेरे सेवक बुलाते हैं आ,

ना देरी तू लगा,

डमरुँ वाले डमरुँ बजा,

तेरे सेवक बुलाते हैं आ,

ना देरी तू लगा…..

मेरे तन मन में मेरे जीवन में,

भोले जी तुम हो समाए,

तेरे सिवा अब दुनिया में मुझको,

दूजा नहीं कुछ भी भाए,

जपूँ तेरी माला और शम्भू निराला,

पियूँ नाम के तेरे प्याले,

डमरुँ वाले डमरुँ बजा,

तेरे सेवक बुलाते हैं आ,

ना देरी तू लगा……

है प्यार तुमको भक्तो से अपने,

देरी नहीं अब लगाओ,

एक बार डमरू जोक मगन तुम,

भोले जी डम डम बजाओ,

विनय सुनलो मेरी लगाओ न देरी,

ओ शंकर सदाशिव निराले,

डमरुँ वाले डमरुँ बजा,

तेरे सेवक बुलाते हैं आ,

ना देरी तू लगा……..

सेवक हूँ मैं भी भोले तुम्हारा,

मुझको नहीं भूल जाना,

दृष्टि दया की एक बार अब तो,

हम पर भी बाबा उठाना,

खबर लो हमारी ओ भोले भंडारी,

शरण में पड़ा हूँ उठा ले,

डमरू वाले, डमरू बजा,

डमरुँ वाले डमरुँ बजा,

तेरे सेवक बुलाते हैं आ,

ना देरी तू लगा…

डमरुं वालें डमरू बजा,

तेरे सेवक बुलाते हैं आ,

ना देरी तू लगा,

डमरुँ वाले डमरुँ बजा,

तेरे सेवक बुलाते हैं आ,

ना देरी तू लगा…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।