भोले हम पे ना चले सिलबट्टा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हम पर ना चले सिलबट्टा हमारे पिया....

घोट घोटत कुंडी घिस गई,

हाथों में पड़ गए छाले हमारे पिया,

भोले हम पे ना चले सिलबट्टा हमारे पिया....

एक दिना की होए तो घोटू,

रोज रोज को है रट्टा ओ भोले पिया,

भोले हम पे ना चले सिलबट्टा हमारे पिया....

जा दिन से मैं ब्याह के आई,

बाज रहा है सिलबट्टा ओ भोले पिया,

भोले हम पे ना चले सिलबट्टा हमारे पिया....

शिव गोरा में हो गई लड़ाई,

हो गई गुत्थमगुत्था हमारे पिया,

भोले हम पे ना चले सिलबट्टा हमारे पिया....

ब्रह्मा विष्णु मनायवे को आए,

हमरो मनावे सिंगटटा ओ भोले पिया,

भोले हम पे ना चले सिलबट्टा हमारे पिया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।