शिव में मिलना है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कितना रोकु मन के सोर को,

ये कहा रुकता है,

इस सोर से परे उस मौन से मिलना है,

मुझे शिव से भी नही शिव में मिलना है……

मुझे शिव से नही शिव में मिलना है,

मुझे शिव से नही शिव में मिलना है,

मुझे शिव से नही शिव में मिलना है….

अपने अहम् की अहुति दे जलना है,

अपने अहम् की अहुति दे जलना है,

मुझे शिव से नही शिव में मिलना है,

मुझे शिव से नही शिव में मिलना है……

क्यू मुझे किसी और के,

कस्टो का कारन बन्ना है,

चाँद और सीष सुशोभित,

उस चाँद सा शीतल बन्ना है….

क्यू मुझे किसी और के,

कस्टो का कारन बन्ना है,

चाँद और सीष सुशोभित,

उस चाँद सा शीतल बन्ना है,

उस चाँद सा शीतल बन्ना है……….

मुझे शिव से नही शिव में मिलना है,

मुझे शिव से नही शिव में मिलना है……

जितना मैं भटका,

उतना मैला हो आया हो,

जितना मैं भटका,

उतना मैला हो आया हो…..

कुछ ने है छला मोहे,

कुछ को मै छल आया हो,

कुछ को मै छल आया हो…..

मुझे शिव से नही शिव में मिलना है,

मुझे शिव से नही शिव में मिलना है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।