आज मेरे शिव भंगिया पीकर

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आज मेरे शिव भंगिया पीकर,

नशे खींची चार चिलम।।

नशे शिव की डमरू गिर गई,

कैसे बोले डम डम।।

आज मेरे शिव भंगिया पीकर,

नशे खींची चार चिलम।।

नशे में चंदा नीचे आ गयो।

कैसे चमके चम चम चम।।

आज मेरे शिव भंगिया पीकर,

नशे खींची चार चिलम।।

नशे में गंगा नीचे आगई।

कैसे बहे अब छम छम छम।।

आज मेरे शिव भंगिया पीकर,

नशे खींची चार चिलम।।

नशे में "राजेन्द्र" भोले नाचे।

धरती होबे छम छम छम।।

आज मेरे शिव भंगिया पीकर,

नशे खींची चार चिलम।।

गीतकार/गायक-राजेंद्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।