किथे मुरली बजदी सुन भगता

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ढोल वजदा नगाड़े वजदे,

किथे मुरली बजदी सुन भगता.....

राम नचदे सीता नचदी,

किथे हनुमत नचदा देख भगता,

ढोल वजदा........

शिव नचदे गौरा नचदी,

किथे नंदी नचदा देख भगता,

ढोल वजदा.........

विष्णु नचदे लक्ष्मी नचदी,

किथे नारद नाचदा देख भगता,

ढोल वजदा........

गवाले नचदे सखिया नचदी,

किथे राधा नचदी देख भगता,

ढोल वजदा..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।